पीएम मोदी सुबह गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंचे, गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि दी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंचे। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा अचानक तय की गई थी। पीएम मोदी ने गुरुद्वारा रकाबगंज में किया श्रद्धांजलि उन्होंने गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि दी।

बता दें कि जब प्रधानमंत्री मोदी यहां पहुंचे थे, तब न तो कोई विशेष पुलिस व्यवस्था थी और न ही कोई ट्रैफिक डायवर्जन किया गया था। भीषण ठंड और शीश नवाए के बीच प्रधानमंत्री सुबह-सुबह एक सामान्य व्यक्ति की तरह गुरुद्वारा रकाबगंज पहुंचे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा अचानक तय की गई थी। इसलिए गुरुद्वारे के आसपास कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रकाबगंज दौरे की तस्वीरें जारी की हैं। इसके अलावा, उन्होंने गुरुमुखी भाषा में एक संदेश भी दिया है।

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रकाबगंज गुरुद्वारा की यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि आज सुबह मैंने ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में प्रार्थना की, जहां श्री गुरु तेग बहादुर जी के पवित्र शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है, दुनिया के लाखों लोगों की तरह, मैं भी श्री गुरु तेग बहादुर जी की करुणा से प्रेरित और प्रेरित हूं।

पीएम मोदी ने कहा कि यह गुरु साहिब का विशेष आशीर्वाद है कि हमारी सरकार के कार्यकाल में, हम गुरु तेग बहादुर जी का 400 वां प्रकाश पर्व मनाएंगे। आइए इस ऐतिहासिक अवसर को गुरु तेग बहादुर के आदर्शों को याद करके मनाते हैं।

बता दें कि दिल्ली का गुरुद्वारा रकाबगंज सिखों का एक पवित्र स्थान है। यह गुरुद्वारा संसद भवन के पास स्थित है। इसका निर्माण वर्ष 1783 में हुआ था।

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यह वही स्थान है जहाँ सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का अंतिम संस्कार किया गया था। यहां उनके शिष्य लखी शाह बंजारा और उनके पुत्र द्वारा उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया।

बता दें कि मुगल शासक औरंगजेब ने 1675 ई। में दिल्ली के चांदनी चौक में गुरु तेग बहादुर की हत्या की थी। गुरु तेग बहादुर का जन्म 1 अप्रैल 1621 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रकाबगंज गुरुद्वारा की यात्रा तब हुई है जब पंजाब के सिख किसान नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर लगभग 25 दिनों से धरने पर बैठे हैं। माना जा रहा है कि पीएम के इस समय के दौरान सिख किसानों को संदेश देने की कोशिश है कि सरकार किसानों से बात करने से पीछे नहीं हट रही है।